Jun 5, 2019

Fixed deposits: बैंक FD खुलवाने का है प्लान, तो इन 8 बातों का रखें ध्यान

Fixed deposits: बैंक FD खुलवाने का है प्लान, तो इन 8 बातों का रखें ध्यान


अगर FD में निवेश करना चाहते हैं तो यह वक्त सही कहा जा सकता है. वजह है कि मॉनटेरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग शुरू हो चुकी है और कम ग्रोथ रेट व अन्य कारकों को देखते हुए अनुमान हैं कि RBI प्रमुख ब्याज दरों में कटौती कर सकता है.
Fixed deposits: बैंक FD खुलवाने का है प्लान, तो इन 8 बातों का रखें ध्यान

सेविंग्स के लिए ज्यादातर भारतीय फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को तवज्जो देते हैं. इसे बचत का सरल और जोखिम रहित विकल्प माना जाता है. अगर आप FD में निवेश करना चाहते हैं तो यह वक्त सही कहा जा सकता है. इसकी वजह है कि RBI की मॉनटेरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग शुरू हो चुकी है और कम ग्रोथ रेट व अन्य कारकों को देखते हुए ऐसे अनुमान हैं कि RBI प्रमुख ब्याज दरों में कटौती कर सकता है.

FD भले ही निवेश का सरल माध्यम हो लेकिन इसमें पैसा डालते वक्त भी कुछ बातों पर गौर कर लेना जरूरी है….

Fixed deposits ब्याज दर

बैंक FD पर तय अवधि के लिए तय ब्याज दर रहती है. ब्याज को मासिक, तिमाही, छमाही, सालाना या फिर मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने के बाद प्रिंसिपल अमाउंट के साथ ही लिया जा सकता है.अक्सर लोग FD राउंड फिगर कहलाने वाली अवधि जैसे 6 माह, 1 साल, 2 साल आदि के हिसाब से कराते हैं. कुछ बैंकों में इस राउंड फिगर अवधि के लिए, इससे 1 या थोड़े ज्‍यादा दिन या कम दिनों के लिए FD पर ब्‍याज दर अलग-अलग होती है. इसलिए FD खुलवाने से पहले FD अवधि और उस पर ब्‍याज का पता जरूर कर लें. हो सकता है कि राउंड फिगर अवधि के बजाय थोड़े दिन कम या ज्‍यादा पर कुछ एक्‍स्‍ट्रा ब्‍याज मिल जाए.

पैसे की सेफ्टी

ध्यान रहे कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) स्कीम के तहत किसी भी बैंक के दिवालिया हो जाने पर डिपॉजिटर का केवल 1 लाख रुपये तक का अमाउंट सुरक्षित है, फिर चाहे उसका कितना भी पैसा बैंक में क्यों ने हो. इस लिमिट में प्रिंसिपल अमाउंट व ब्याज दोनों शामिल है. साथ ही एक ही बैंक की अलग-अलग ब्रांच में किए गए विभिन्न डिपॉजिट सभी को मिलाकर भी केवल 1 लाख रुपये की ही गांरटी ली जाती है. इसलिए अच्‍छा होगा अगर आप बड़ी रकम को एक FD में न रखकर अलग-अलग बैंकों में इन्वेस्ट करें. इसके फायदे ये भी हैं कि अगर इमरजेंसी में रकम की जरूरत है तो जरूरत के मुताबिक रकम की FD तोड़कर काम चला सकते हैं. एक अन्य फायदा यह भी है कि अगर एक जगह कम ब्‍याज है तो दूसरी जगह ज्‍यादा ब्‍याज ले सकते हैं.

जिस ब्‍याज पर खुलवाई है FD, अवधि पूरी होने तक मिलेगा वही

भले ही RBI ब्‍याज दरों में बदलाव करे लेकिन आपको FD की अवधि पूरी होने तक वही ब्‍याज मिलेगा, जो FD खुलवाते वक्‍त था. ब्‍याज दर में बदलाव नई खोले जाने वाली FD या फिर टेनर पूरा होने के बाद FD रिन्‍यूअल पर ही लागू होता है. इसलिए मौजूदा FD धारक को इससे किसी भी तरह का फायदा या 
नुकसान नहीं होता.



टैक्स

बैंक FD से आने वाला ब्याज टैक्स के तहत आता है. इसे अन्य स्त्रोत से आय में गिना जाता है. मौजूदा नियम के तहत अगर एक फाइनेंशियल ईयर में FD से मिलने वाला ब्याज 40000 रुपये से ज्यादा है तो बैंक डिपॉजिटर को ब्याज का भुगतान करने से पहले 10 फीसदी टैक्स एट सोर्स यानी TDS काट सकते हैं. अगर आपने किसी बैंक में 1 से ज्‍यादा FD खुलवा रखी हैं तो ब्‍याज की गणना सभी FD के ब्‍याज को मिलाकर होगी. हालांकि आप इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करके काटे गए टैक्‍स का क्‍लेम कर सकते हैं.
बैंक आपका TDS न काटें, इसके लिए आप फॉर्म 15G /15H भरकर जमा कर सकते हैं. यह सेल्‍फ डिक्‍लेरेशन फॉर्म होता है, जिसमें आपके टैक्‍सेबल लिमिट में न आने का डिक्‍लेरेशन होता है. इसके अलावा कुछ बैंक टैक्‍स सेविंग FD, स्‍पेशल FD की भी सुविधा देते हैं.

मैच्‍योरिटी से पहले तोड़ने पर देना होता है चार्ज

कई बैंक मैच्‍योरिटी पीरियड से पहले निकाल ली जाने वाली FD की भी सुविधा देते हैं. यानी आप इन्‍हें जरूरत के वक्‍त तोड़ सकते हैं लेकिन ऐसा करने पर बैंक आपसे प्री-मैच्‍योरिटी चार्ज वसूलते हैं. साथ ही मिलने वाला ब्याज भी घट जाता है.

Fixed deposits का नॉमिनेशन

अगर आप FD खुलवा रहे हैं तो सेविंग्‍स अकाउंट या अन्‍य स्‍कीमों की तरह इसमें भी किसी अन्‍य इन्‍सान को नॉमिनी बनाएं, ताकि अगर आपको कुछ हो भी जाता है तो आपका इन्‍वेस्‍ट किया हुआ पैसा बेकार नहीं जाएगा.
जरूरत के वक्त FD पर मिल जाता है 

लोन
अगर पैसों की जरूरत आन पड़ी है तो आप अपनी FD पर लोन भी ले सकते हैं. इसे ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी कहते हैं. इसमें आपको एक नि​श्चित अवधि के अंदर तय ब्याज दर के साथ अमाउंट चुकाना होता है. लेकिन इसे EMI में चुकाने की बाध्यता नहीं होती, आप अवधि के अंदर कभी भी एकमुश्त या टुकड़ों में पैसे चुका सकते हैं. साथ ही अगर अवधि से पहले पैसे चुका दिए तो प्रीपेमेंट चार्ज भी नहीं देना होता और ब्याज भी केवल उतने की दिन का देना होता है, जितने दिन अमाउंट आपके पास रहा. SBI आपको FD पर FD अमाउंट के 90 फीसदी तक का लोन उपलब्‍ध कराता है. यह 25000 रुपये से 5 करोड़ रुपये तक है.

अपनी सहूलियत से चुनें FD टेन्योर

कई लोग FD लॉन्ग टर्म जैसे 5 या 10 साल के लिए खुलवाते हैं तो कई शॉर्ट टर्म जैसे 1, 2 या फिर 3 साल वाली FD खुलवाते हैं. हर इंसान अपनी-अपनी सहूलियत के हिसाब से ऐसा करता है. आपको भी FD खुलवाने से पहले यह जरूर सोच लेना चाहिए कि आप इसमें किस तरह का इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं, शॉट टर्म या लॉन्ग टर्म. फिर उसी हिसाब से FD का टेनर चुनें.

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